Ukraine Presidential Protest : लंबे समय से रूस के साथ युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति को अपने घर में ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जलेन्स्की के खिलाफ उनके ही देश में लोग विरोध प्रदर्शन जता रहे हैं। बताया जा रहा है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन में आम जनता के साथ-साथ सैनिक भी शामिल हैं। हाल ही में यूक्रेन की संसद के द्वारा पास किए गए एक कानून का इनके द्वारा विरोध किया जा रहा है। इस कानून के विरोध में लोगों के द्वारा राष्ट्रपति कार्यालय के बाहर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया गया। जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। बताया जा रहा है कि जिस बिल के कारण यूक्रेन के राष्ट्रपति का विरोध किया जा रहा है उसमें प्रमुख भ्रष्टाचार विरोधी संस्थानों पर निगरानी बढ़ाई जाने की संभावना है। इसे देखते हुए ही लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
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संस्थाओं की आजादी छीन रहे राष्ट्रपति!
यूक्रेन के राष्ट्रपति पर आरोप है कि उनके द्वारा संसद में जिस बिल को पास कराया गया है वह अलोकतांत्रिक है। इस बिल के पास हो जाने के बाद भ्रष्टाचार विरोधी संस्थानों पर शिकंजा कस दिया जाएगा। नेशनल एंटी करप्शन ब्यूरो ऑफ यूक्रेन और स्पेशलाइज्ड एंटी करप्शन प्रॉसिक्यूटर ऑफिस पर इस बिल के पास हो जाने के बाद निगरानी बढ़ा दी जाएगी। लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लोगों कहना है कि इस बिल के पास हो जाने के बाद इन संस्थाओं की आजादी समाप्त हो जाएगी। यूक्रेन के राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त किए जाने वाले अटॉर्नी जनरल को ताकत प्राप्त होगी। ऐसे में अटॉर्नी जनरल को ताकत मिलने के कारण इन संस्थाओं की कमजोरी सामने आ सकती है। उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति पर आरोप लगाया कि संसद के द्वारा लिया गया यह फैसला युद्ध के मूल उद्देश्यों को चोट पहुंचाने वाला है और इससे लोकतंत्र की पारदर्शिता समाप्त हो जाएगी।
सैनिकों ने बताया विश्वास घात
लंबे समय से यूक्रेन के साथ रूस का युद्ध चल रहा है। ukrain के राष्ट्रपति के विरोध में किये जा रहे प्रदर्शन के दौरान यह देखने को मिल रहा है कि कई घायल सैनिक भी प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं। आम जनता के साथ-साथ बड़ी मात्रा में घायल सैनिकों के इस प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर चिंता जताई जा रही है। सैनिकों का कहना है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति के द्वारा उनके साथ विश्वास घात किया जा रहा है। रूस के द्वारा लंबे समय से ड्रोन और मिसाइल से यूक्रेन पर हमला किया जा रहा है। ऐसे में यूक्रेन की संसद के द्वारा यह बिल पास करना नैतिक रूप से यूक्रेन के लिए बड़ा झटका है।

यूक्रेन की संसद के द्वारा पास किए गए प्रस्ताव का यूरोपीय संघ और दूसरे देशों के द्वारा भी विरोध किया जा रहा है। इनका कहना है कि ऐसा करने से यूक्रेन की यूरोपीय संघ की सदस्यता प्रभावित हो सकती है। यूक्रेन के लिए इस समय भ्रष्टाचार से लड़ना काफी आवश्यक है। लगातार चल रहे युद्ध में यूक्रेन को यूरोपीय संघ और पश्चिमी देशों से बड़ी स्तर पर मदद मिल रही है। यही कारण है कि भ्रष्टाचार का अंदेशा होने के कारण बड़े स्तर पर लोगों के द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
राष्ट्रपति ने किया कानून का समर्थन
एक तरफ यूक्रेन की संसद के द्वारा पेश किए गए इस बिल का आम जनता और सैनिकों के द्वारा विरोध किया जा रहा है। यूरोपीय संघ और विभिन्न देश भी इसके विरोध में उतर आए हैं जबकि यूक्रेन के राष्ट्रपति के द्वारा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ अच्छा करार दिया गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही भ्रष्टाचार की लंबित जांच और एजेंटीयों की जवाबदेही तय करने के लिए यह जरूरी हो गया था। देश में भ्रष्टाचार में कमी लाने के उद्देश्य से इस बिल को पेश किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए यूक्रेन के लिए यह कदम उठाना काफी जरूरी था। यूक्रेन की सरकार लगातार यह आरोप लगा रही है कि भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने वाली एजेंसी में रूस की खुफिया एजेंसियों की घुसपैठ हो गई है। इसीलिए इन्हें अटॉर्नी जनरल के अधीन लाना आवश्यक था।
सत्ता पर कब्जे की कोशिश कर रहे राष्ट्रपति -विपक्ष
यूक्रेन में हो रहे राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर विपक्ष का कहना है कि विभिन्न जांच एजेंसियों पर अटॉर्नी जनरल का महत्व बढ़ाने के पीछे यूक्रेन के राष्ट्रपति की अलग मंशा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति चाह रहे हैं कि सभी सरकारी एजेंसियों पर कब्जा करते हुए सत्ता को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लिया जा सके। रूस और यूक्रेन के युद्ध चलने के कारण 3 साल से यूक्रेन में चुनाव नहीं हो पा रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यूक्रेन के राष्ट्रपति जालेंस्की पर यह आरोप लगा चुके हैं कि वह युद्ध का बहाना लगाते हुए लंबे समय से यूक्रेन में चुनाव नहीं करा पा रहे हैं। सत्ता में बने रहने के लिए उनके द्वारा ऐसा किया जा रहा है। जिन संस्थाओं पर अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति की गई है उन संस्थाओं के द्वारा भी इसे लेकर संयुक्त बयान दिया गया है उनका कहना है कि अगर यह कानून लागू हुआ तो इन दोनों संस्थाओं की आजादी खत्म हो जाएगी।






