US Russia Trade : अमेरिका के द्वारा लगातार रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर सक्रियता दिखाई जा रही है। इसे लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिले थे। उसके बाद उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ यूरोपीय नेताओं से भी मुलाकात की थी। अमेरिका के द्वारा लगातार रूस पर दबाव बनाया जा रहा है। रूस के साथ व्यापार करने वाले विभिन्न देशों पर अमेरिका के द्वारा बड़ी मात्रा में टैरिफ लगाने की घोषणा की जा चुकी है। साथ ही साथ रूस पर अमेरिका के द्वारा विभिन्न तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं लेकिन अमेरिका अब खुद रूस के साथ व्यापार करने को बेताब दिख रहा है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक अमेरिका रूस के साथ ऊर्जा समझौता करना चाहता है। खबर सामने आ रही है कि पुतिन और ट्रंप की मुलाकात में भी इस समझौते पर बातचीत हुई थी।
रूस पर प्रतिबंध हटा सकता है अमेरिका
रूस यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका के द्वारा रूस को लेकर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। अमेरिका के द्वारा रूस पर विभिन्न तरह के प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यह प्रतिबंध लगाए गए थे जिसके बाद रूस को निवेश के क्षेत्र में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था लेकिन अब अमेरिका के द्वारा रूस को शांति वार्ता के लिए सहमत किया जा रहा है। इसके लिए अमेरिका रूस पर लगे प्रतिबंधों को भी हटा सकता है। ऐसा करने के पीछे अमेरिका की रणनीति भी है। अमेरिका लगातार रूस से परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जहाज खरीदने की कोशिश कर रहा है।
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अलास्का में घोषणा करना चाहते थे ट्रंप
15 अगस्त को अलास्का में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात हुई थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुलाकात के बाद ही रूस के साथ बड़े समझौते की घोषणा करना चाहते थे लेकिन दोनों नेताओं की मुलाकात में समझौता नहीं हो पाने के कारण इसे रोक दिया गया। दूसरे देशों पर रूस के साथ व्यापार करने का आरोप लगाने वाला अमेरिका खुद रूस के साथ बड़े स्तर पर व्यापार कर रहा है। अमेरिका के द्वारा 2024 में रूस के साथ लगभग 40000 करोड़ से भी अधिक का व्यापार किया गया।
अमेरिका के द्वारा लगातार रूस यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए अमेरिका के द्वारा विभिन्न हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। अमेरिका के द्वारा भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की जा चुकी है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेन्स ने कहा कि भारत पर लगाया गया अतिरिक्त टैरिफ रूस पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। युद्ध किसी के भी हित में नहीं है। इसलिए हम लगातार आक्रामक कूटनीति का सहारा ले रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में रूस पर दबाव बनाने के लिए और भी कदम उठाए जा सकते हैं।
कम या ज्यादा हो सकता है टैरिफ
अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने रूस यूक्रेन युद्ध पर बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका के द्वारा लगातार रूस को शांति के रास्ते पर लाने की कोशिश की जा रही है। अगर रूस के साथ चल रही वार्ता में सकारात्मक प्रगति होती है तो आने वाले समय में विभिन्न देशों पर लगाए गए टैरिफ कम किया जा सकता हैं लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो विभिन्न देशों पर टैरिफ की मात्रा को बढ़ाया भी जा सकता है। अमेरिका के द्वारा लगातार यूक्रेन का साथ देने को लेकर उपाद किया जा रहा है। यूक्रेन अमेरिका तथा यूरोप के दूसरे देशों से सुरक्षा की गारंटी की मांग कर रहा है। इसे देखते हुए ही रूस और यूक्रेन के साथ बातचीत करते हुए अमेरिका यह कोशिश कर रहा है कि वर्तमान में चल रही जंग को खत्म करने के साथ-साथ यह युद्ध भविष्य में फिर नहीं हो इसके लिए रास्ता निकाला जाए।

‘तेल खरीद से रूस को मिल रहा पैसा’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड सलाहकार ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद भारत के द्वारा बड़े स्तर पर रूस से व्यापार किया जा रहा है। कच्चे तेल की खरीद करते हुए भारतीय कंपनियों के द्वारा उसे रिफाइन करने के बाद महंगे दाम पर बेचा जा रहा है। इस तरह युद्ध में रूस को आर्थिक समर्थन मिल रहा है। दूसरी तरफ भारत लगातार मुनाफा कमा रहा है। भारत अमेरिका को सामान बेचकर जो पैसा मिलता है उस से रूसी तेल खरीदने का कार्य कर रहा है। उन्होंने बड़ा दावा किया कि रूस और यूक्रेन युद्ध में शांति का रास्ता भारत से होकर गुजरता है। अगर देखा जाए तो भारत को रूस के तेल की आवश्यकता नहीं है लेकिन मुनाफा कमाने के कारण भारत के द्वारा ऐसा किया जा रहा है।
टैरिफ की धमकी से झुके देश : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमारे द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों में चल रहे संघर्षों को खत्म करने के लिए टैरिफ का दबाव बनाया गया। विभिन्न संघर्ष कर रहे देश यदि लड़ाई करते हुए सभी को मारना चाहते हैं तो ऐसा कर सकते हैं लेकिन यदि हमारे साथ आपको फिर व्यापार करना होगा तो 100% टैरिफ देना होगा। यह सुनने के बाद सभी देशों के द्वारा हार मान ली गई जिसके कारण यह संघर्ष खत्म हुए। अमेरिका के मुताबिक भारत पर लगाया गया अतिरिक्त टैरिफ भी उसी रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका के द्वारा लगातार रूस पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए वह रूस के साथ व्यापार करने के कारण भारत पर अतिरिक्त टैरिफ की घोषणा कर चुका है।






