Operation Sindoor : भारत की CDS अनिल चौहान ने एक बार फिर पाकिस्तान के साथ चल रही तनातनी को लेकर बयान देते हुए कहा कि भारत लंबे समय से शांतिप्रिय देश है लेकिन शांति वादी नहीं है। दुश्मन देश के द्वारा गलतफहमी पैदा नहीं करनी चाहिए। हमारे देश की सेना हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहती हैं। मध्य प्रदेश में आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने यह बयान दिया। इस कार्यक्रम में तीनों सेनाओ के प्रमुख मौजूद होने के साथ-साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित थे। चौहान ने कहा की शक्ति के बिना शांति संभव नहीं है। अगर आप शांति चाहते हैं तो आपको हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि शांति शक्ति से ही प्राप्त की जा सकती है।
‘जारी है ऑपरेशन सिंदूर’
भारतीय CDS अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर पर बयान देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर लगातार जारी है। यह एक आधुनिक संघर्ष था जिसके द्वारा भारत ने विभिन्न सबक प्राप्त किए हैं। इस ऑपरेशन से प्राप्त हुए सबक पर लगातार अमल किया जा रहा है। महाभारत और गीता को उन्होंने युद्ध नीति का सबसे बेहतरीन उदाहरण बताया। चौहान ने कहा कि चाणक्य की नीति के द्वारा चंद्रगुप्त को विजय प्राप्त हुई थी। शक्ति, उत्साह और युक्ति युद्ध नीति के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। शस्त्र और शास्त्र दोनों को एक साथ फॉलो किया जाना चाहिए। चौहान ने कहा कि आने वाले समय में यदि जंग होती है तो वह बेहद खतरनाक होगी। तीनों सेनाओ के द्वारा मिलकर ही जंग को जीता जा सकता है। हमें हर कंडीशन में सशक्त और आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करनी होगी।
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22 मिनट में आतंकी ठिकाने नष्ट- मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने टैरिफ के साथ-साथ भारत सेना के द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद हमारे द्वारा लिए गए बदले को पूरी दुनिया के द्वारा देखा गया। 22 मिनट में सेना की कार्रवाई में आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने चरखा धारी और सुदर्शन धारी का जिक्र करते हुए कहा कि गुजरात की धरती दो मोहन की धरती है। भारतीय सेना के पराक्रम और इच्छा शक्ति का प्रतीक उन्होंने सुदर्शन धारी को बताया जबकि आत्मनिर्भर के रूप में चरखा धारी हैं। आतंकवादियों के द्वारा भारत के खिलाफ किसी भी तरह की साजिश का निर्माण किया गया तो भारत के द्वारा उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। आतंकवादियों के द्वारा पहले हमारे देश में खून बहाया जाता था लेकिन दिल्ली में बैठी सरकार के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव देखने को मिल रहा है। सीमा विवाद तथा दूसरे कारणों से दोनों देशों के बीच संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। कुछ दिनों पहले ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक बार फिर युद्ध की स्थिति पैदा हो गई थी। इसके बाद दोनों देश संघर्ष विराम पर सहमत हुए थे लेकिन संघर्ष विराम को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा दिए जा रहे बयान को लेकर बार-बार भारत के द्वारा आपत्ति जताई जा रही है। एक बार फिर भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट करते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों में मध्यस्थता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। इस बारे में हम बहुत स्पष्ट हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका के द्वारा संघर्ष विराम करने पर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि जब भी दो देशों के बीच संघर्ष होता है तो वह एक दूसरे से बात करते हैं। दूसरे देशों के द्वारा भी फोन किए गए थे। यह कोई सीक्रेट बात नहीं है। रूस यूक्रेन तथा इजरायल ईरान के दौरान हमने भी विभिन्न फोन किए थे। आज के ग्लोबल रिश्तो में यह आम बात हो गई है लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम किसी तीसरे देश की वजह से हुआ था यह स्वीकार नहीं है।

भारत स्थगित कर चुका सिंधु जल संधि
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से सिंधु जल संधि चली आ रही थी लेकिन कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हो जाने के बाद भारत के द्वारा पाकिस्तान को लेकर कठोर निर्णय लिए गए थे। दोनों देशों के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए थे। कई दिनों तक युद्ध की स्थिति बने रहने के बाद भारत और पाकिस्तान संघर्ष विराम पर सहमत हुए थे। इसी दौरान भारत के द्वारा सिंधु जल संधि को भी स्थगित करने का निर्णय लिया गया था। सिंधु जल संधि स्थगित कर देने के बाद पाकिस्तान में खलबली मची हुई है। भारत के द्वारा सिंधु तथा इससे जुड़ी दूसरी नदियों के जल प्रभाव का आंकड़ा पाकिस्तान को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। सिंधु जल संधि स्थगित कर देने के बाद पाकिस्तान में जल की समस्या और भी अधिक गहरा गई है। पाकिस्तान के द्वारा इसे लेकर लगातार भारत से गुहार की जा रही है लेकिन भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकी गतिविधियों को संचालित करने के कारण पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की नरमी नहीं बढ़ती जाएगी।






