Trump Tariff Policy : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा लगातार टैरिफ के मुद्दे पर कदम उठाए जा रहे हैं। वह अब तक दुनिया के विभिन्न देशों पर टैरिफ की घोषणा कर चुके हैं। ट्रंप के द्वारा जापान पर भी अमेरिका से चावल खरीदने को लेकर दबाव बनाने की बात सामने आई है जबकि जापान ने अमेरिका के दबाव में झुकने से इनकार कर दिया है। अमेरिका के द्वारा बनाए जा रहे दबाव के कारण जापान ने अपने डेलिगेशन का दौरा रद्द कर दिया है। यह पहली बार नहीं है जब किसी देश के ऊपर अमेरिका के द्वारा दबाव बनाया गया हो। इससे पहले भारत पर भी अमेरिका ने मांसाहारी दूध खरीदने को लेकर प्रेशर बनाया था लेकिन भारत ने स्पष्ट तौर पर मना कर दिया था। इसके बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया था।
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अमेरिका कर रहा घरेलू नीतियों में हस्तक्षेप -जापान
अमेरिका के साथ होने वाली वार्ता के डेलिगेशन दौरे को रद्द कर देने के बाद जापान की तरफ से बड़ा बयान दिया गया। उनके आरोप है की अमेरिका के द्वारा जापान की घरेलू नीतियों में हस्तक्षेप किया जा रहा है। अमेरिका के द्वारा लगातार टैरिफ लगाया जा रहा है और हमें टैरिफ घटने की कोई उम्मीद नहीं है। इसीलिए डेलिगेशन दौरे को भी रद्द करने का निर्णय लिया है। अमेरिका के द्वारा पहले जापान पर दबाव डालकर अमेरिका पर लगाए गए टैरिफ को कम कराया जा चुका है। इसके बाद वह कृषि उत्पादों का आयात बढ़ाने के लिए जापान पर दबाव बना रहे हैं। अमेरिका के ऊपर लगाए गए टैरिफ को कम करने के बाद जापान को यह उम्मीद थी कि वह भी टैरिफ कम करेगा लेकिन अब जापान का भरोसा अमेरिका से उठ गया है।
अमेरिका के द्वारा लगातार रूस यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए अमेरिका के द्वारा विभिन्न हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। अमेरिका के द्वारा भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की जा चुकी है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेन्स ने कहा कि भारत पर लगाया गया अतिरिक्त टैरिफ रूस पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। युद्ध किसी के भी हित में नहीं है। इसलिए हम लगातार आक्रामक कूटनीति का सहारा ले रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में रूस पर दबाव बनाने के लिए और भी कदम उठाए जा सकते हैं।
कम या ज्यादा हो सकता है टैरिफ
अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने रूस यूक्रेन युद्ध पर बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका के द्वारा लगातार रूस को शांति के रास्ते पर लाने की कोशिश की जा रही है। अगर रूस के साथ चल रही वार्ता में सकारात्मक प्रगति होती है तो आने वाले समय में विभिन्न देशों पर लगाए गए टैरिफ कम किया जा सकता हैं लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो विभिन्न देशों पर टैरिफ की मात्रा को बढ़ाया भी जा सकता है। अमेरिका के द्वारा लगातार यूक्रेन का साथ देने को लेकर उपाद किया जा रहा है। यूक्रेन अमेरिका तथा यूरोप के दूसरे देशों से सुरक्षा की गारंटी की मांग कर रहा है। इसे देखते हुए ही रूस और यूक्रेन के साथ बातचीत करते हुए अमेरिका यह कोशिश कर रहा है कि वर्तमान में चल रही जंग को खत्म करने के साथ-साथ यह युद्ध भविष्य में फिर नहीं हो इसके लिए रास्ता निकाला जाए।

‘भारत पर हाई टैरिफ समझ से परे’
भारतीय विदेश मंत्री ने रूस के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद की गई ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यूरोपीय यूनियन नेचुरल गैस खरीदने के मामले में भारत से काफी आगे है। रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद दक्षिणी देशो के द्वारा लगातार रूस के साथ व्यापार बढ़ाया गया फिर भी अमेरिका के द्वारा सिर्फ भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। यह समझ से परे है। अमेरिका के द्वारा पहले यह कहा जाता था कि भारत ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीदना जारी रखें लेकिन अब अमेरिका के द्वारा अपने स्टैंड को बदला जा रहा है। भारत और रूस के रिश्तों पर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत और रूस का रिश्ता दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तो में से एक है।
भारत के द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद जरूरत के आधार पर की जाती है। भारतीय विदेश मंत्री के द्वारा रूस के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद विभिन्न मुद्दों पर सहमति जताई है। लंबे समय से चल रहे रूस और यूक्रेन युद्ध का असर दुनिया के दूसरे देशों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका के द्वारा भारत पर रूस के साथ व्यापार करने का आरोप लगाया जा रहा है। इसी कारण भारत पर 25% टैरिफ लगाने के बाद 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की गई थी। अमेरिका का आरोप है कि भारत के द्वारा रूस से यूक्रेन युद्ध के बाद भी कच्चे तेल का व्यापार किया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार ने भारत को लेकर एक बार फिर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद करते हुए मुनाफाखोरी का कार्य कर रहा है। अमेरिकी पैसे के द्वारा इंडियन कंपनियों द्वारा तेल खरीदते हुए ज्यादा रेट पर बेचा जा रहा है। इसीलिए भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाना जरूरी हो गया है।





