China Victory Day : चीन में आज विक्ट्री डे पर रोड का आयोजन किया जाएगा। चीन की राजधानी में यह परेड आयोजित की जाएगी। द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के ऊपर चीन की जीत की सालगिरह पर यह परेड आयोजित की जा रही है। चीन की कोशिश है कि इस जीत को और बड़ी जीत के तौर पर पेश करना है। इसे लेकर लगातार चीन में तैयारी की जा रही है। चीन में आयोजित होने वाली विक्ट्री डे परेड में पाकिस्तान रूस तथा ईरान के साथ-साथ अलग-अलग देशों के नेतृत्व कर्ता शामिल होंगे। लगभग 25 देशो के लीडर शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। विक्ट्री डे परेड का आयोजन चीन के द्वारा जीत के जश्न के साथ-साथ अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए भी किया जा रहा है। इसके द्वारा चीन ग्लोबल साउथ को एकजुट करते हुए पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेगा।
1945 में जापान ने स्वीकार की हार
1937 में जापान और चीन के बीच लड़ाई शुरू हो गई थी। इस लड़ाई में जापान के द्वारा चीन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया गया था। जापानी सेना लगातार चीन में अत्याचार कर रही थी। इसमें बड़ी मात्रा में लोगों की जान चली गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत 1939 में हुई थी लेकिन इस जापान और चीन की लड़ाई को भी द्वितीय विश्व युद्ध से जोड़कर माना जाता है। जापान के द्वारा चीन पर हमला करने के बाद अमेरिका ने बड़ी मात्रा में न्यूक्लियर हमले किए। इसके बाद 15 अगस्त 1945 को जापान के द्वारा समर्पण कर दिया गया। औपचारिक तौर पर 2 सितंबर 1945 को जापान ने हार स्वीकार कर ली थी। जापान के द्वारा हार स्वीकार करने के बाद चीन अब इस हार को अपनी जीत के तौर पर पेश करता रहा है। यह भी चर्चा है कि चीन के द्वारा खुद की और सोवियत यूनियन की युद्ध में प्रशंसा की जाती है जबकि पश्चिमी देशों के साथ-साथ अमेरिका की भूमिका को लेकर कभी चर्चा नहीं की गई।
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चीन और रूस के साथ भारत की नजदीकी से अमेरिका को एतराज
परेड के जरिए ताकत दिखाएगा चीन
आयोजित होने वाली विक्ट्री डे परेड में चीन अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगा। इसके लिए वह मिलिट्री पावर तथा ग्लोबल स्तर पर बड़ा प्रदर्शन करेगा। लगभग 100 से भी ज्यादा लड़ाकू विमान की मौजूदगी में हजारों सैनिक इस विक्ट्री डे परेड में आयोजित होंगे। मॉडर्न हथियारों की प्रदर्शनी भी चीन के द्वारा की जाएगी। चीन का लंबे समय से ताइवान तथा पश्चिमी देशों से तनाव चल रहा है। ऐसे में वह पश्चिमी देशों के साथ-साथ ताइवान को चेतावनी देने की भी कोशिश करेगा। चीन हर स्थिति में युद्ध के लिए तैयार । अतिरिक्त उत्तर कोरिया चीन ईरान और रूस के संबंधों को मजबूत करने की कोशिश भी इस परेड के द्वारा की जाएगी। चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग का यह लंबे समय से मानना रहा है कि पश्चिमी देशों की तुलना में अब दुनिया को विभिन्न पश्चिमी देशों की अनुपस्थिति में नया संगठन तैयार करना चाहिए जिसका नेतृत्व चीन के द्वारा किया जाए।
चीन और रूस के साथ भारत की नजदीकी से अमेरिका को एतराज
अमेरिका के द्वारा भारत के साथ किये जा रहे बर्ताव के बाद भारत ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अमेरिका के सामने झुकने की बजाय अब वह चीन तथा रूस को प्राथमिकता दे रहा है। शंघाई सहयोग संगठन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति से मुलाकात की। इसी दौरान रूस के राष्ट्रपति पुतिन से भी भारतीय प्रधानमंत्री मोदी मिले। चीन के राष्ट्रपति भारतीय प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति की मुलाकात के कारण अमीरीका में चिंता बढ़ गई है। अमेरिका ने रूस भारत और चीन के एक साथ होने पर एतराज जताया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार का मानना है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुतिन और जिनपिंग के साथ होने की वजह से अमेरिका के साथ खड़ा होना चाहिए। मोदी का पुतिन और जिनपिंग के साथ खड़ा होना शर्मनाक है। पता नहीं ऐसा वह किस सोच के साथ कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द ही भारत के द्वारा रूस की बजाय अमेरिका का साथ दिया जाएगा।

एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा लगातार दुनिया के दूसरे देशों को टैरिफ के दम पर झुकाया जा रहा है। कुछ देशों के द्वारा इसका मुखर विरोध भी किया जा रहा है। इसके कारण वैश्विक स्तर पर लगातार स्थिति बदलती नजर आ रही है। कई देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लगातार नाराज हैं। इसीलिए अमेरिका से उनके रिश्तों में तनाव बना हुआ है। दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति इस मौके को शानदार तरीके से उठाते हुए दिख रहे हैं। ट्रंप से नाराजगी के बीच जिनपिंग के द्वारा अपनी ताकत का नजारा पेश किया जा रहा है। शंघाई सहयोग संगठन की मीटिंग में दुनिया के विभिन्न देशों के बड़े नेता शामिल हुए। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लंबे समय पश्चात चीन दौरे पर पहुंचे। अमेरिका से भारत तथा रूस जैसे देश इस समय दूर है और इसका मौका जिनपिंग उठाने वाले हैं।
एक दूसरे के करीब आ रहे हैं भारत चीन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा अपनाई जा रही नीतियों के कारण भारत तथा चीन इस समय अमेरिका से नाराज हैं। दुनिया की सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश भारत और चीन लगातार एक दूसरे के संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन पहुंचने पर चीन के राष्ट्रपति के द्वारा उनसे मुलाकात की गई। साथ ही मोदी का रेड कारपेट से स्वागत किया गया। भारत और चीन दोनों पर ही अमेरिका के द्वारा टैरिफ लगाने की धमकी दी गई है।वैश्विक स्तर पर लगातार परिदृश्य बदलता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिका के द्वारा लगातार विभिन्न देशों को टैरिफ का दबाव दिखाया जा रहा है।





