India US Tariff : हाल ही में भारत के द्वारा अमेरिका की डाक सेवा को स्थगित कर दिया गया था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा भारत पर थोपे गए टैरिफ तथा नए व्यापार नियमों के कारण ऐसा किया गया था। भारत के द्वारा यह कदम उठाए जाने के बाद अब यूरोपीय देशों के द्वारा भी अमेरिका के साथ डाक सेवा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। इटली ब्रिटेन जर्मनी और फ्रांस के द्वारा डाक सेवा सर्विस को सस्पेंड कर दिया गया है। इसका कारण ट्रंप के टैरिफ को माना जा रहा है। यूरोपीय डाक संगठन पोस्ट यूरोप और दूसरे डाक विभागों के मुताबिक अमेरिका सरकार के द्वारा बनाए गए नए नियमों पर साफ जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है। इसीलिए फिलहाल डाक सर्विस से सामान भेजने की सेवाएं स्थगित की जा रही है।
हाल ही में अमेरिका के द्वारा भारत पर बड़ी मात्रा में टैरिफ की घोषणा की गई थी। अमेरिका का आरोप है कि रूस यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत के द्वारा रूस से व्यापार किया जा रहा है। इसी कारण भारत पर 25% टैरिफ लगाने के बाद 25% अतिरिक्त टैरिफ की घोषणा की गई थी। भारत सरकार लगातार अमेरिका के दबाव के बावजूद नहीं झुक रही है। एक बार फिर भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका को करारा जवाब दिया है। भारत सरकार के द्वारा 29 अगस्त से अमेरिका की सभी डाक सेवाओं को अस्थाई रूप से बंद कर दिया जाएगा। अमेरिका के द्वारा बनाए गए नए व्यापार नियमों के कारण भारत सरकार के द्वारा यह फैसला लिया गया है।
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$100 तक के गिफ्ट पर रहेगी छूट
भारतीय संचार मंत्रालय के द्वारा दि जानकारी के मुताबिक 29 अगस्त से अमेरिका की सभी डाक सेवाओं को स्थगित कर दिया जाएगा लेकिन फिलहाल 100 डॉलर तक के गिफ्ट को छूट जारी रहेगी। 29 अगस्त से अमेरिका भेजे जाने वाले सभी डाक सामान पर अतिरिक्त टैक्स देना होगा चाहे फिर उन सामान की कीमत कितनी भी हो। बता दे की कुछ समय पहले ही अमेरिका के द्वारा 70000 रुपए तक के समान पर मिलने वाली छूट को खत्म कर दिया गया था। अमेरिका के द्वारा यह आदेश 30 जुलाई 2025 को जारी किया गया था जिसके बाद भारत ने जैसे को तैसा के रूप में यह कदम उठाया है। भारत सरकार के द्वारा लिए गए इस निर्णय के बाद डाक सेवाओं के साथ-साथ पत्र तथा पार्सल सेवाएं प्रभावित होगी। भारतीय संचार मंत्रालय के द्वारा यह बयान दिया गया कि भारत लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हालात सही होने पर दुबारा सेवाओं को शुरू की जा सकती हैं।
लंबे समय से चल रहे रूस और यूक्रेन युद्ध का असर दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में देखा जा रहा है। भारत के ऊपर अमेरिका के द्वारा अतिरिक्त टैरिफ की घोषणा की गई थी। अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है। इसके बाद दुनिया के विभिन्न देशों के द्वारा इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी जा रही है। रूस और चीन के द्वारा टैरिफ के मुद्दे पर भारत का समर्थन करने के बाद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि चीन रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत से आगे है। फिर भी भारत पर ज्यादा टैरिफ लगाया गया है। यह समझ से परे है।

भारतीय विदेश मंत्री ने यह बयान रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के बाद दिया। भारतीय विदेश मंत्री ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के साथ-साथ रूस के विदेश मंत्री से भी मुलाकात की। इसके बाद एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन को भारत से बड़ा कच्चा तेल का खरीदार बताया। चीन के राजदूत ने भारत और चीन के संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि इस समय दुनिया बदलाव के दौर से गुजर रही है। भारत और चीन दो ऐसे देश है जो सिर्फ एशिया के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए इनकी दोस्ती फायदेमंद हो सकती है। एशिया की आर्थिक प्रगति के लिए भारत और चीन दो इंजन के रूप में कार्य कर रहे हैं। चीन के राजदूत ने यह भी कहा कि शंघाई सहयोग संगठन में शामिल होने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई गति देगा।
‘भारत पर हाई टैरिफ समझ से परे’
भारतीय विदेश मंत्री ने रूस के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद की गई ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यूरोपीय यूनियन नेचुरल गैस खरीदने के मामले में भारत से काफी आगे है। रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद दक्षिणी देशो के द्वारा लगातार रूस के साथ व्यापार बढ़ाया गया फिर भी अमेरिका के द्वारा सिर्फ भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। यह समझ से परे है। अमेरिका के द्वारा पहले यह कहा जाता था कि भारत ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीदना जारी रखें लेकिन अब अमेरिका के द्वारा अपने स्टैंड को बदला जा रहा है। भारत और रूस के रिश्तों पर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत और रूस का रिश्ता दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तो में से एक है। भारत के द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद जरूरत के आधार पर की जाती है। भारतीय विदेश मंत्री के द्वारा रूस के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद विभिन्न मुद्दों पर सहमति जताई है।






