Russia Ukraine War : रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से युद्ध जारी है। दोनों ही देश के द्वारा एक दूसरे के खिलाफ लगातार पलटवार किया जा रहा है। 2022 से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति के द्वारा रूस के राष्ट्रपति से मुलाकात की गई थी। इन दोनों नेताओं की मुलाकात 15 अगस्त को अलास्का में हुई थी जिसके बाद शांति समझौता होने की संभावना जताई जा रही थी लेकिन इसके बावजूद यूक्रेन और उसके द्वारा लगातार एक दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं। गुरुवार को रूस के द्वारा यूक्रेन पर बड़ा हमला किया गया। रूस के द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले में 15 लोगों की मौत की खबर सामने आ रही है। रूस के द्वारा यूक्रेन पर ड्रोन तथा मिसाइल के माध्यम से हमला किया गया। रूस के द्वारा यूक्रेन पर ऐसे समय में हमले किए जा रहे हैं जब अमेरिका के नेतृत्व में लगातार दोनों देशों के बीच वार्ता की कोशिश हो रही है।
बातचीत के बजाय मिसाइल का रास्ता चुन रहा रूस
रूस के द्वारा यूक्रेन पर हमले किए जाने के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति ने बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि लगातार रूस के साथ बातचीत की कोशिश की जा रही है लेकिन रूस के द्वारा बातचीत की बजाये मिसाइल का रास्ता चुना जा रहा है। ऐसे कठिन समय में दुनिया को शांति के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है। रूस के द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले में 30 से अधिक मिसाइल तथा 500 से अधिक ड्रोन इस्तेमाल किए गए। रूस के रक्षा मंत्रालय के द्वारा भी यह दावा किया गया कि उनके द्वारा किए गए हमले सटीक थे। रूस के हमले में यूरोपीय यूनियन के दूतावास को भी बड़ी मात्रा में नुकसान होने की खबर है। हालांकि यूरोपीय यूनियन के कर्मचारी सुरक्षित होने का दावा यूरोपीय यूनियन के अध्यक्ष के द्वारा किया गया। यूरोपीय यूनियन के अध्यक्ष ने बयान दिया कि रूस के द्वारा लगातार पूरी रात बमबारी की गई।
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‘तेल खरीद से रूस को मिल रहा पैसा’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड सलाहकार ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद भारत के द्वारा बड़े स्तर पर रूस से व्यापार किया जा रहा है। कच्चे तेल की खरीद करते हुए भारतीय कंपनियों के द्वारा उसे रिफाइन करने के बाद महंगे दाम पर बेचा जा रहा है। इस तरह युद्ध में रूस को आर्थिक समर्थन मिल रहा है। दूसरी तरफ भारत लगातार मुनाफा कमा रहा है। भारत अमेरिका को सामान बेचकर जो पैसा मिलता है उस से रूसी तेल खरीदने का कार्य कर रहा है। उन्होंने बड़ा दावा किया कि रूस और यूक्रेन युद्ध में शांति का रास्ता भारत से होकर गुजरता है। अगर देखा जाए तो भारत को रूस के तेल की आवश्यकता नहीं है लेकिन मुनाफा कमाने के कारण भारत के द्वारा ऐसा किया जा रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा 15 अगस्त को रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की गई थी। यह मुलाकात अलास्का में हुई थी। दोनों नेताओं की मुलाकात में लंबे समय से चल रहे रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति के द्वारा यूक्रेन के राष्ट्रपति तथा यूरोपीय नेताओं से भी मुलाकात की गई थी। इस बैठक में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पुतिन से फोन पर बातचीत की थी। जिसके बाद यह संभावना जताई जा रही थी कि जल्द ही रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ यूक्रेन के राष्ट्रपति की मुलाकात होगी लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन दोनों की मुलाकात को मुश्किल करार दिया है।
उन्होंने कहा कि रूस के राष्ट्रपति के द्वारा जलेन्स्की को पसंद नहीं किया जाता है इसलिए वह उनसे मिलना नहीं चाहते। ट्रंप ने कहा कि दोनों की होने वाली मुलाकात पर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। यह मुलाकात हो भी सकती है और नहीं। ट्रंप ने कहा कि रूस के साथ लगातार युद्ध रोकने की बातचीत चल रही है लेकिन रूस के द्वारा इसके बावजूद यूक्रेन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। अच्छी बातचीत के बावजूद रूस यूक्रेन पर हमला कर देता है। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि रूस और यूक्रेन के द्वारा आमने-सामने आकर बातचीत नहीं की गई तो आने वाले समय में इसका बुरा असर होगा।

रूस की सुरक्षा सबसे जरूरी -पुतिन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात के बाद रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि रूस के लिए रूस की सुरक्षा सबसे पहले है। पुतिन इससे पहले भी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अपना मत स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने आने वाले समय में होने वाली मीटिंग को रूस के मास्को में आयोजित करने का सुझाव दिया। रूस और अमेरिका के राष्ट्रपति प्रेस कांफ्रेंस करने के कुछ समय पश्चात ही तुरंत मंच से रवाना हो गए।
ट्रंप बोले यूक्रेन पर निर्भर रहेगी लड़ाई
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि लंबे समय से चल रहे रूस और यूक्रेन के युद्ध का भविष्य यूक्रेन के राष्ट्रपति पर निर्भर है। यदि यूक्रेन के राष्ट्रपति चाहे तो यह युद्ध जल्दी ही खत्म हो सकता है। सब कुछ अब यूक्रेन के राष्ट्रपति पर निर्भर है। यूक्रेन के राष्ट्रपति के द्वारा शांति का रास्ता अपनाया जाता है या फिर लड़ाई को जारी रखा जाता है। अमेरिका के राष्ट्रपति के द्वारा पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर को याद करते हुए कहा गया की 12 साल पहले बिना किसी दबाव और युद्ध के क्रीमिया को रूस को सौंप दिया गया था और यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं हुआ था। ऐसे में बहुत सारी चीज कभी बदलने वाली नहीं है।






